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जैसलमेर के पूर्व महारावल बृजराज सिंह नहीं रहे, जिले में शोक की लहर

  #जैसलमेर के पूर्व महारावल बृजराज सिंह नहीं रहे,  दिल्ली स्थित मेदांता अस्पताल में हुआ निधन,  लीवर की समस्या से ग्रसित थे पूर्व महारावल, सोनार दुर्ग का ध्वज झुकाया था महारावल बृजराज सिंह ने,  जिले में शोक की लहर #Jaisalmer #MahaRawal

वर्ष 1860 ई० मे 'प्रतिहार राजपूतों' की रियासत- नागौद के राजा राघवेन्द्र सिंहजी का आयोजित दरबार का रियासती दृश्य।

वर्ष 1860 ई० मे 'प्रतिहार राजपूतों' की रियासत- नागौद के राजा राघवेन्द्र सिंहजी का आयोजित दरबार का रियासती दृश्य। यह वर्तमान में मध्यप्रदेश में स्तिथ हैं। #raajghraanno #nagod #pratihar #rajput 

कयाद्रा ( कसारदा ) का युद्ध 1178 मुहम्मद गौरी की भारत भूमि पर प्रथम पराजय

" कयाद्रा ( कसारदा ) का युद्ध 1178 मुहम्मद गौरी की भारत भूमि पर प्रथम पराजय " " पाटन की राजमाता नायिका देवी व बाल मुलराज सोलंकी के नेतृत्व में यह युद्ध लड़ा गया था " वर्तमान में कसदा #सिरोही राज्य में स्थित पश्चिम रेलवे के कोवरली स्टेशन से लगभग 4 मील उत्तर में स्थित आधुनिक कायद्रा " नामक गांव है भारतीय सीमा पर मुल्तान और उच्छ पर अधिकार कर लेने से मुहम्मद गौरी का साहस बढा और अब वह 1178 ई . में मुल्तान और उच्छ होता हुआ गुजरात की राजधानी अन्हिलवाडा पाटन ( नहरवाला ) की और बढा ।  पृथ्वीराज महाकाव्य के अनुसार इस अभियान के समय पृथ्वीराज चौहन के हस्तक्षेप के अनुमान से मुहम्मद गौरी उसे तटस्थ रखने के लिए उसके पास अपना एक दूत भेजा था । यदपि पृथ्वीराज चौहन तृतीय चालुक्य शासक की मदद करना चाहता थे किन्तु अपने मंत्री कदम्बवास के हस्तक्षेप के कारण वह ऐसा नही कर सके मुस्लिम सेना किराडू होते हुए आगे बड़ी और  नोडल ' पर अधिकार कर लिया । किराडू से मिले कार्तिक सुद्री 13 गुरुवार संवत 1235 26 अक्टूम्बर 1178 ई . के शिलालेख में वर्णित है कि गुजरात के शासक सम्राट भीमदेव दि के शासन स